मंगलवार, 14 फ़रवरी 2023

पाॅब्‍लो पिकासो

पाॅब्‍लो पिकासो एक महान पेंटर थे कलाकार थे। उनकी महानता की झलक, उनके कहे वाक्‍यों से भी जानी जा सकती है। वे महान बन सके क्‍योंकि उनकी मॉं ने बचपन में उनसे कहा था कि जो भी करो, सीधे शीर्ष ही तुम्‍हारी मंजिल होना चाहिए। वे पेंटर बने तो पेंटर के शीर्ष पर पहुँँचे।
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पिकासो का जीवन देखें तो पता चलता है कि महानता बीज रूप में बचपन में बो दी जाती है। बाद के समय में तो वह बस विकसित ही होती है। बचपन में मॉं के रोपे विचार ने पिकासो का मार्ग प्रशस्‍त किया। ठीक इसका उल्‍टा भी देखा जा सकता है कि मॉं यदि नकारात्‍मक विचारों के बीज बो दे तो बच्‍चा फिर जीवन भर कुछ खास नहीं कर पाता है। इसे सिध्‍दांत के रूप में तो नहीं लिया जा सकता है मगर इस बात से बच्‍चों के मन पर पड़ने वाली छाप का पता चलता है। बच्‍चों के कोमल मन पर किस बात की छाप कैसे पड़ जाती है और वह विकसित होते होते क्‍या असर दिखाती है, इसे अलबर्ट आंइस्‍टाईन के बचपन से भी देखा जा सकता है, कहानी क‍हती है कि वे बचपन में मंद बुध्दि थे और स्कूल ने उनकी  मॉं को कहा कि आपका बच्‍चा मंद बुध्दि है और इसे कृपा कर अपने घर ले जाएं और आप ही पढ़ाएं तब मॉं ने अलबर्ट से क्‍या कहा यह जानना बहुत महत्वपूर्ण है। आप इसे झूठ कह सकते हैं किन्तु हर वास्तविक सच, अपने बचपन में एक झूठ ही होता है। वह झूठ ही विकसित हो कर वास्तविकता में बदलता है। हर वैज्ञानिक एक तथाकथि‍त झूठ पर ही काम करता है, जिसे संकल्पना कहा जाता है, एक हाईपोथि‍सिस पर ही वह कार्य करता है, जो शेष विश्व के लिए उस समय वास्तविक नहीं होती किन्तु उस वैज्ञानिक के लिए वही मानसिक रूप से सच होता है, जिसके आधार पर वह अपना कार्य करता चला जाता है और एक दिन, वही तथाकथि‍त झूठ, सच में तब्दील हो जाता है। तो आंस्टाईन की मॉं ने अपने बच्चे से कहा,

कि 
तुम यूनिक और स्‍पेशल हो 
और 
यह स्‍कूल 
तुम्‍हें नहीं पढ़ा सकती  
इस बात से अलबर्ट को बचपन से ही अहसास हो गया कि 
वह यूनिक है, एक्‍सट्रा आर्डनरी है
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वहीं भारत में 
आम माताएं अपने बच्‍चों को जाने अनजाने में 
क्‍या कहती हैं, बानगी देखिए

तू नालायक है...

तू कामचोर है...

तू मक्‍कार है...

तू हरामखोर है...

तू बेशर्म है...

हम क्‍या उम्‍मीद कर सकते हैं, ऐसे बच्‍चे के बारे में जो ये इसी तरह के मिलते जुलते वाक्‍य डेली बेसिस पर रोज-रोज सुनता है। उसका अवचेतन क्‍या संग्रहित करता है और जाहिर है वह जीवन में क्‍या तो कर ही पाएगा। वह निश्चित ही अपने अवचेतन से बहुत कुछ वास्तविकता में बदल लेता है और अपने को बचपन में कहे वाक्यों के आधार पर ढाल लेता है। अपने मॉं-बाप के कहे शब्दों को चरितार्थ करता है। मॉं-बाप कहते हैं, हमारा बच्चा नालायक निकल गया। काश, मॉं-बाप लायक होते....।
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बच्‍चों से 
बहुत सोच समझ कर बात करें, 
वे आप की बात को बहुत गौर से सुनते और गुनते हैं
आपको  सुन कर वे भविष्य का अपना फाउंडेशन बना रहे हैं 
 

शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2023

 

मध्यप्रदेश राज्य के नियम, अधि‍नियमों और कानूनों के संग्रह की

एक महत्वपूर्ण वेबसाईट

https://www.code.mp.gov.in/

वेबसाईट में मध्यप्रदेश राज्य के अधिनियमों और नियमों का डिजिटल संग्रह है। 

स वेबसाईट पर शासन के द्वारा जारी सभी नियम, अधि‍नियम, आदेश और अन्य संबंधि‍त जानकारियों का समावेश किया गया है। यदि शासन के किसी खास विभाग के किसी नियम की जानकारी चाहते हैं तो इस वेबसाईट पर दिए गए ऑप्शन बॉक्स में अपने ऑप्शन चुनकर, जानकारी पीडीएफ फार्मेट में हासिल कर सकते हैं। यह वेबसाईट खास तौर पर विधि‍क व्यवसाय में संलग्न प्रोफेशनल्स के लिए बहुत उपयोगी है, जिनको राज्य शासन के विभि‍न्न नियम, अधि‍नियम और इसी तरह की अन्य जानकारियों की जरूरत पड़ती रहती है।

मध्‍य प्रदेश के राज्‍य अधिनियम, इन अधिनियमों के अंतर्गत बनाये गये नियम, स्‍वतंत्र रूप से बनाये गये राज्‍य के अन्‍य नियम कुछ महत्‍वपूर्ण केन्‍द्रीय अधिनियम एवं राज्‍य द्वारा इनमें किये गये संशोधन वेबसाईट में बहुत ही व्यवस्थि‍त रूप और क्रमबध्द रूप से सम्मिलित किये गये हैं ।

 

इसमें मूल पाठ के साथ ही केन्‍द्रीय कानूनों/नियमों में राज्‍य द्वारा किए गए संशोधनों को भी सम्म‍िलित किया गया है।

 

उपयोगकर्ता (यूजर) द्वारा इस वेबसाइट के मुख्‍य पृष्‍ठ पर दिखाई गई जानकारी के अनुसार उपलब्‍ध नियम, कानून और अधिसूचनाओं से संबंधित लिंक्‍स पर क्लिक करने पर उस पर विषय से संबंधि‍त विस्‍तृत सूची को देखा जा सकता है तथा अपने चाहे गए शीर्षक अथवा लिंक पर क्लिक करके तत्संबंधि‍त  विस्‍तृत जानकारी को न केवल देख, पढ़ सकते हैं, उसे पीडीएफ में प्राप्‍त भी किया जा सकता है। 


इस वेब पोर्टल पर उपलब्‍ध कराई गई सामग्री न केवल कानून या विधिक क्षेत्र के शोधकर्ताओंइस क्षेत्र में कार्यरत व्यवसायियोंअधिवक्‍तागण एवं विधिक क्षेत्र  से संबंधि‍त सभी नागरिकों के लिये उपयोगी होने के साथ-साथ जन प्रतिनिधियों एवं आम आदमी के सन्‍दर्भ कार्य में भी उपयोगी है। इस वेबसाईट का सबसे बड़ा फायदा तो यह  है कि एक की समय और जगह पर यह सभी डिजिटल फार्मेट में उपलब्ध है।

https://www.code.mp.gov.in/


इसी तरह की उपयोगी जानकारी को आप तक लाते रहने का प्रयास है


धन्‍यवाद 

बुधवार, 1 फ़रवरी 2023

नट-मॉरल-ऑफ-द-स्टोरी


 यह है साहिल और ब्रजेश, मध्यप्रदेश के दमोह जिले के हैं। पूछने पर बताया कि पेशे से नट हैं। नट वही लोग होते हैं जो अपने शारीरिक करतब दिखा कर अपना पेट पालते हैं। इतने ऊॅंचे बॉंस पर चढ़कर ये लोगों का मनोरंजन करते हैं। ब्रजेश का कहना है कि ये सब बैलेंस का खेल है।

ब्रजेश की बात को सुनकर लगा कि पूरा जीवन ही बेलैंस का खेल है। बेलैंस खोया कि सब कुछ ही भरभरा कर गिर जाता है। इतनी ऊँचाई पर पंहुचने के लिए बहुत नीचे से शुरू करना होता है।

पैरों को बांस पर बने इस ठीये पर बांधना होता है और फिर इन्हें उठा कर एक दम खड़ा कर दिया जाता है। खड़ा करते ही ये अपना संतुलन बनाना शुरू करते हैं। पूछने पर बताया कि पहले केवल एड़ी की ऊँचाई से शुरू करते हैं और धीरे धीरे फिर ऊँचाई बढ़ाते जाते हैं। इतनी ऊँचाई पर एक दम से नहीं पहुंच जाते हैंबहुत धीरे-धीरे शुरूआत होती हैऊँचाई पर पंहुचतने की और इतनी ऊँचाई पर टिके रहने के लिए लगातार हिलते डुलते रहना होता है।

मॉरल ऑफ द स्टोरी 

यही है कि पहले ऐड़ी जहॉं तक ऊँची हो, वहीं तक ऊँचाई को संतुलन बनाना होगा फिर धीरे-धीरे इतनी ऊँचाई पर पहुंचें कि गिरने पर चोट न लगे और संतुलन ही आखि‍री वह चीज़ है जिसे हासिल किया जाना है।


रविवार, 20 अक्टूबर 2019

अद्वैत का मतलब


जब आप एक कहते हो
तब
वो भी शून्य और दो की तुलना में कहते हो
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ये प्रकृति
त्रिगुणात्मक है
.
हर कहना
आपको सीमित करता है
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विशाल
भी एक सीमा है
चाहे कितना भी विशाल हो
अनंत की तुलना में वह सीमित है
.
अनंत
जब भी कहा जाएगा
वह सीमित हो जाएगा
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मौन को
अनंत कहा गया है
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लकड़ी
पानी में गिरती है
या
पानी पर गिरती है
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पानी के निम्नतम तल से
उसकी दूरी,
उसका भौतिक स्वभाव होता है
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आपका भौतिक रुप
आपको सीमित करता है
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मनुष्य
अपनी शारीरिक सीमितता से
असीम तक पंहुचना चाहता है
उसे पाना चाहता है
यही उसकी समस्या है
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किसी भी चीज को
आप पा नहीं सकते
क्योंकि
शरीर में बहुत सूक्ष्म ही जा सकता है
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एक कांटा तो शरीर में
जा नहीं सकता,
घुसते ही बिलबिला देता है
असीम की शरीर में
कोई गुंजाइश ही कहाँ ?
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पहले ही
अनंत थे
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शरीर
एक सीमा है
अनंत की
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अनंत को
शरीर मिलना
अद्भुत है
.
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दूरी को किलो में
कैसे नापोगे
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कई आयाम हैं
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तुम कहाँ हो
और
क्यों हो
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rm

शनिवार, 19 अक्टूबर 2019

#समझदार wisdom

#समझदार
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कभी बहस नहीं करते
क्योंकि वो सुनी जा रही
बात की आत्मा को
जानने के लिए
कुछ शब्द
या तो
अपनी तरफ से
जोड़ लेते हैं
या घटा देते हैं
.
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ये न तो
ज्यादा पूछते हैं
न ज्यादा बताते हैं
बस, सुनते रहते हैं
.
rm
(Pic:rm)

बुधवार, 16 अक्टूबर 2019

स्लेंग Slang

अंग्रेजी में स्लेंग शब्दों का बढ़ा बोल बाला है। नेटिव इंग्लिश में इसका बहुत इस्तेमाल होता है। मुझे लगा कि हिन्दी में भी स्लेंग शब्द और फ्रेजेस होते हैं और हम इनका उपयोग धड़ल्ले से करते हैं मगर हम इन्हें बहुत इज्जत की निगाह से नहीं देखते। हम सोचते हैं, ये हमारी भाषा को फूहड़ बनाते हैं मगर अंग्रेजी के स्लेंग शब्दों के बारे में जब जानने को मिला तो पता चला कि इस तरह के शब्दों और वाक्यांशों से हमारी भाषा भरी पड़ी है। बानगी के रूप में जो फौरी तौर पर मुझे याद आ रहे हैं,

वो ये रहे आपके स्क्रीन पर —

भाड़ में जाओ
चल, फूट ले
पतली गली से निकल लो

और वो तमाम तरह की गालियों के घिसे पिटे रूप भी जो हमारी भावनाओं के साथ में हम जोड़ कर बोल देते हैं। हमारे भोपाल में तो दो तीन बहुत ही पापुलर हैं।

कुछ इसी तरह के शब्द आपको भी याद आ रहे हों तो कमेंट बाक्स में जरूर टपकाते जाना...!
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आर एम
पोर्टल और पोटली बाबा की
#Portal & Potlee

पोर्टल, एक अंग्रेजी शब्द है और वेब की दुनिया में धड़ल्ले से उपयोग होता है। इसका यदि हिन्दी शब्द ढ़ूंढ़ने की कोशिश करें तो कहीं नहीं मिलेगा और शायद कभी नहीं मिलेगा। मगर यदि इसके लिए पोटली शब्द का उपयोग करें तो यह उस अर्थ को बखूबी बताएगा जिसके लिए पोर्टल शब्द उपयोग होता है। पोर्टल में यही होता है न कि वेब पर पोर्टल खोला और संबंधित सारी जानकारी के पते ठिकानों के आईकान या लिंक वगैरह दिख जाते हैं। पोटली में भी तो यही क्रिया होती है। पोटली खोली और सब सामान के एकसाथ दर्शन हो जाते है। पोटली, यही शायद पोर्टल के लिए एक उपयुक्त हिन्दी शब्द हो सकता है, जो अर्थ के साथ ही उच्चारण में भी समानता रखता है। इस लिहाज से पोर्टल अजनबी शब्द नहीं लगेगा।


chat GPT

 कृत