जब आप एक कहते हो
तब
वो भी शून्य और दो की तुलना में कहते हो
.
ये प्रकृति
त्रिगुणात्मक है
.
हर कहना
आपको सीमित करता है
.
विशाल
भी एक सीमा है
चाहे कितना भी विशाल हो
अनंत की तुलना में वह सीमित है
.
अनंत
जब भी कहा जाएगा
वह सीमित हो जाएगा
.
मौन को
अनंत कहा गया है
.
लकड़ी
पानी में गिरती है
या
पानी पर गिरती है
.
पानी के निम्नतम तल से
उसकी दूरी,
उसका भौतिक स्वभाव होता है
.
आपका भौतिक रुप
आपको सीमित करता है
.
मनुष्य
अपनी शारीरिक सीमितता से
असीम तक पंहुचना चाहता है
उसे पाना चाहता है
यही उसकी समस्या है
.
किसी भी चीज को
आप पा नहीं सकते
क्योंकि
शरीर में बहुत सूक्ष्म ही जा सकता है
.
एक कांटा तो शरीर में
जा नहीं सकता,
घुसते ही बिलबिला देता है
असीम की शरीर में
कोई गुंजाइश ही कहाँ ?
.
पहले ही
अनंत थे
.
शरीर
एक सीमा है
अनंत की
.
अनंत को
शरीर मिलना
अद्भुत है
.
.
.
दूरी को किलो में
कैसे नापोगे
.
कई आयाम हैं
.
तुम कहाँ हो
और
क्यों हो
.
rm

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