बुधवार, 22 फ़रवरी 2023

Verbatimशब्दश:Verbatimका हिन्दीमेंअर्थhindi

 


गूगल में जब आप सर्च करते हैं तब वह दो तरह से खोज करता है, एक तो उसके आस पास के और मिलते जुलते शब्दों के आधार पर all result दूसरा ऑप्शन होता है, Verbatim इस शब्द का मतलब होता है, शब्दश: यानि कि जो आपने टाईप किया है, ठीक वही का वही। आपको जब इस तरह से सर्च करना हो तो आप इस ऑप्शन का उपयोग कर अपनी  सर्च को और अधि‍क एक्यूरेसी से कर सकते हैं।

शनिवार, 18 फ़रवरी 2023

हरसूद/https://exuberantrmbhopal.wordpress.com/

हरसूद के बारे में बहुत दिनों से एक ब्‍लॉग का विचार बन रहा था। आज उसे अमली जामा पहना ही दिया। आज तो बस उसे शुरू किया है, धीरे-धीरे हरसूद से संबंधित सभी जानकारी और फोटो अपलोड करना शुरू कर दिया है। हालांकि ये काम मुझे 2004 से ही शुरू कर देना था, मगर कुछ जानकारी का अभाव, कुछ समय का अभाव और कुछ इच्‍छा शक्ति का अभाव इसका कारण रहे कि मैं ऐसा कर नहीं पाया था। अब इसे पूरा करना ही है। पुराना एक ब्‍लॉग ब्‍लॉग स्‍पाट पर बनाया था मगर अब वह पेज दिखता है, एक्‍सेस नहीं हो पाता है। मैने उसका पीछा छोड़ दिया और नयी वेबसाईट बना ही ली।   

हरसूद https://exuberantrmbhopal.wordpress.com


मंगलवार, 14 फ़रवरी 2023

पाॅब्‍लो पिकासो

पाॅब्‍लो पिकासो एक महान पेंटर थे कलाकार थे। उनकी महानता की झलक, उनके कहे वाक्‍यों से भी जानी जा सकती है। वे महान बन सके क्‍योंकि उनकी मॉं ने बचपन में उनसे कहा था कि जो भी करो, सीधे शीर्ष ही तुम्‍हारी मंजिल होना चाहिए। वे पेंटर बने तो पेंटर के शीर्ष पर पहुँँचे।
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पिकासो का जीवन देखें तो पता चलता है कि महानता बीज रूप में बचपन में बो दी जाती है। बाद के समय में तो वह बस विकसित ही होती है। बचपन में मॉं के रोपे विचार ने पिकासो का मार्ग प्रशस्‍त किया। ठीक इसका उल्‍टा भी देखा जा सकता है कि मॉं यदि नकारात्‍मक विचारों के बीज बो दे तो बच्‍चा फिर जीवन भर कुछ खास नहीं कर पाता है। इसे सिध्‍दांत के रूप में तो नहीं लिया जा सकता है मगर इस बात से बच्‍चों के मन पर पड़ने वाली छाप का पता चलता है। बच्‍चों के कोमल मन पर किस बात की छाप कैसे पड़ जाती है और वह विकसित होते होते क्‍या असर दिखाती है, इसे अलबर्ट आंइस्‍टाईन के बचपन से भी देखा जा सकता है, कहानी क‍हती है कि वे बचपन में मंद बुध्दि थे और स्कूल ने उनकी  मॉं को कहा कि आपका बच्‍चा मंद बुध्दि है और इसे कृपा कर अपने घर ले जाएं और आप ही पढ़ाएं तब मॉं ने अलबर्ट से क्‍या कहा यह जानना बहुत महत्वपूर्ण है। आप इसे झूठ कह सकते हैं किन्तु हर वास्तविक सच, अपने बचपन में एक झूठ ही होता है। वह झूठ ही विकसित हो कर वास्तविकता में बदलता है। हर वैज्ञानिक एक तथाकथि‍त झूठ पर ही काम करता है, जिसे संकल्पना कहा जाता है, एक हाईपोथि‍सिस पर ही वह कार्य करता है, जो शेष विश्व के लिए उस समय वास्तविक नहीं होती किन्तु उस वैज्ञानिक के लिए वही मानसिक रूप से सच होता है, जिसके आधार पर वह अपना कार्य करता चला जाता है और एक दिन, वही तथाकथि‍त झूठ, सच में तब्दील हो जाता है। तो आंस्टाईन की मॉं ने अपने बच्चे से कहा,

कि 
तुम यूनिक और स्‍पेशल हो 
और 
यह स्‍कूल 
तुम्‍हें नहीं पढ़ा सकती  
इस बात से अलबर्ट को बचपन से ही अहसास हो गया कि 
वह यूनिक है, एक्‍सट्रा आर्डनरी है
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वहीं भारत में 
आम माताएं अपने बच्‍चों को जाने अनजाने में 
क्‍या कहती हैं, बानगी देखिए

तू नालायक है...

तू कामचोर है...

तू मक्‍कार है...

तू हरामखोर है...

तू बेशर्म है...

हम क्‍या उम्‍मीद कर सकते हैं, ऐसे बच्‍चे के बारे में जो ये इसी तरह के मिलते जुलते वाक्‍य डेली बेसिस पर रोज-रोज सुनता है। उसका अवचेतन क्‍या संग्रहित करता है और जाहिर है वह जीवन में क्‍या तो कर ही पाएगा। वह निश्चित ही अपने अवचेतन से बहुत कुछ वास्तविकता में बदल लेता है और अपने को बचपन में कहे वाक्यों के आधार पर ढाल लेता है। अपने मॉं-बाप के कहे शब्दों को चरितार्थ करता है। मॉं-बाप कहते हैं, हमारा बच्चा नालायक निकल गया। काश, मॉं-बाप लायक होते....।
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बच्‍चों से 
बहुत सोच समझ कर बात करें, 
वे आप की बात को बहुत गौर से सुनते और गुनते हैं
आपको  सुन कर वे भविष्य का अपना फाउंडेशन बना रहे हैं 
 

शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2023

 

मध्यप्रदेश राज्य के नियम, अधि‍नियमों और कानूनों के संग्रह की

एक महत्वपूर्ण वेबसाईट

https://www.code.mp.gov.in/

वेबसाईट में मध्यप्रदेश राज्य के अधिनियमों और नियमों का डिजिटल संग्रह है। 

स वेबसाईट पर शासन के द्वारा जारी सभी नियम, अधि‍नियम, आदेश और अन्य संबंधि‍त जानकारियों का समावेश किया गया है। यदि शासन के किसी खास विभाग के किसी नियम की जानकारी चाहते हैं तो इस वेबसाईट पर दिए गए ऑप्शन बॉक्स में अपने ऑप्शन चुनकर, जानकारी पीडीएफ फार्मेट में हासिल कर सकते हैं। यह वेबसाईट खास तौर पर विधि‍क व्यवसाय में संलग्न प्रोफेशनल्स के लिए बहुत उपयोगी है, जिनको राज्य शासन के विभि‍न्न नियम, अधि‍नियम और इसी तरह की अन्य जानकारियों की जरूरत पड़ती रहती है।

मध्‍य प्रदेश के राज्‍य अधिनियम, इन अधिनियमों के अंतर्गत बनाये गये नियम, स्‍वतंत्र रूप से बनाये गये राज्‍य के अन्‍य नियम कुछ महत्‍वपूर्ण केन्‍द्रीय अधिनियम एवं राज्‍य द्वारा इनमें किये गये संशोधन वेबसाईट में बहुत ही व्यवस्थि‍त रूप और क्रमबध्द रूप से सम्मिलित किये गये हैं ।

 

इसमें मूल पाठ के साथ ही केन्‍द्रीय कानूनों/नियमों में राज्‍य द्वारा किए गए संशोधनों को भी सम्म‍िलित किया गया है।

 

उपयोगकर्ता (यूजर) द्वारा इस वेबसाइट के मुख्‍य पृष्‍ठ पर दिखाई गई जानकारी के अनुसार उपलब्‍ध नियम, कानून और अधिसूचनाओं से संबंधित लिंक्‍स पर क्लिक करने पर उस पर विषय से संबंधि‍त विस्‍तृत सूची को देखा जा सकता है तथा अपने चाहे गए शीर्षक अथवा लिंक पर क्लिक करके तत्संबंधि‍त  विस्‍तृत जानकारी को न केवल देख, पढ़ सकते हैं, उसे पीडीएफ में प्राप्‍त भी किया जा सकता है। 


इस वेब पोर्टल पर उपलब्‍ध कराई गई सामग्री न केवल कानून या विधिक क्षेत्र के शोधकर्ताओंइस क्षेत्र में कार्यरत व्यवसायियोंअधिवक्‍तागण एवं विधिक क्षेत्र  से संबंधि‍त सभी नागरिकों के लिये उपयोगी होने के साथ-साथ जन प्रतिनिधियों एवं आम आदमी के सन्‍दर्भ कार्य में भी उपयोगी है। इस वेबसाईट का सबसे बड़ा फायदा तो यह  है कि एक की समय और जगह पर यह सभी डिजिटल फार्मेट में उपलब्ध है।

https://www.code.mp.gov.in/


इसी तरह की उपयोगी जानकारी को आप तक लाते रहने का प्रयास है


धन्‍यवाद 

बुधवार, 1 फ़रवरी 2023

नट-मॉरल-ऑफ-द-स्टोरी


 यह है साहिल और ब्रजेश, मध्यप्रदेश के दमोह जिले के हैं। पूछने पर बताया कि पेशे से नट हैं। नट वही लोग होते हैं जो अपने शारीरिक करतब दिखा कर अपना पेट पालते हैं। इतने ऊॅंचे बॉंस पर चढ़कर ये लोगों का मनोरंजन करते हैं। ब्रजेश का कहना है कि ये सब बैलेंस का खेल है।

ब्रजेश की बात को सुनकर लगा कि पूरा जीवन ही बेलैंस का खेल है। बेलैंस खोया कि सब कुछ ही भरभरा कर गिर जाता है। इतनी ऊँचाई पर पंहुचने के लिए बहुत नीचे से शुरू करना होता है।

पैरों को बांस पर बने इस ठीये पर बांधना होता है और फिर इन्हें उठा कर एक दम खड़ा कर दिया जाता है। खड़ा करते ही ये अपना संतुलन बनाना शुरू करते हैं। पूछने पर बताया कि पहले केवल एड़ी की ऊँचाई से शुरू करते हैं और धीरे धीरे फिर ऊँचाई बढ़ाते जाते हैं। इतनी ऊँचाई पर एक दम से नहीं पहुंच जाते हैंबहुत धीरे-धीरे शुरूआत होती हैऊँचाई पर पंहुचतने की और इतनी ऊँचाई पर टिके रहने के लिए लगातार हिलते डुलते रहना होता है।

मॉरल ऑफ द स्टोरी 

यही है कि पहले ऐड़ी जहॉं तक ऊँची हो, वहीं तक ऊँचाई को संतुलन बनाना होगा फिर धीरे-धीरे इतनी ऊँचाई पर पहुंचें कि गिरने पर चोट न लगे और संतुलन ही आखि‍री वह चीज़ है जिसे हासिल किया जाना है।


chat GPT

 कृत